वैसे देखा जाये तो ऑटोमन साम्राज्य अपने समय में दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली था। मुग़ल साम्राज्य ऑटोमन से कई क्षेत्रो जैसे क्षेत्रफल,सेना, और खासकर से जलसेना में बहुत पीछे था। ऑटोमन की नेवी उस समय में दुनिया में सबसे बड़ी और शक्तिशाली नौसेना थी।
The great powers of the Islamic world in the early gunpowder age.
सेना
ऑटोमन साम्राज्य की सेना हमेशा मुग़ल साम्राज्य की सेना से अधिक शक्तिशाली थी। अकबर और औरंगजेब के शासनकाल में भी मुग़ल सेना इतनी ताकतवर नहीं थी जितनी कि ऑटोमन की सेना थी।
आप इसके लिए जाँनिसारी या यानिचारी का उदाहरण ले लीजिये। यह ऑटोमन राजा की निजी पैदल अंगरक्षक सेना थी। यह दुनिया की सबसे शक्तिशाली पैदल सेना थी। जबकि मुग़ल बादशाह के पास ऐसी कोई अंगरक्षक सेना नहीं थी।
The Ottoman Janissary
मुग़ल ने अकबर के बाद अपनी सेना का आधुनिकीकरण नहीं किया जबकि ऑटोमन की सेना हमेशा यूरोपियन सेना से लड़ती रही जिससे उनकी सेना का समय समय पर आधुनिकीकरण होता रहा और वो शक्तिशाली बनते गए।
मुगल साम्राज्य की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक इसकी नौसैनिक शक्ति थी। मुगल साम्राज्य के पास कभी भी समुद्र में युद्ध करने या समुद्र के पार जाकर अपना प्रभाव दिखाने की कोई वास्तविक क्षमता नहीं थी। दूसरी ओर, ओटोमन साम्राज्य के पास एक बहुत शक्तिशाली नौसैनिक बल था। दुनिया में सबसे महान में से एक। इसमें बारब्रोसा जैसे प्रसिद्ध प्रशंसक थे। तुर्क साम्राज्य के पास वास्तव में 16वीं शताब्दी में समुद्र के पार प्रभाव और शक्ति को दिखाने की क्षमता थी। उसकी नौसेना का प्रभाव दक्षिण-पूर्व एशिया तक था।
आर्थिक शक्ति
मुग़ल साम्राज्य हमेशा से आर्थिक रूप से तुर्क साम्राज्य से अधिक शक्तिशाली रहा। तुर्क साम्राज्य के पतन के कारणों में आर्थिक एक महत्वपूर्ण कारण रहा। यही कारण था कि ऑटोमन साम्राज्य का कई बार दिवालिया भी निकल गया था जबकि मुग़ल के साथ ऐसा कुछ नहीं था। मुग़ल के पास हमेशा से आर्थिक ताकत रही और इसी ताकत ने यूरोपीय देशों को भारत की और आकर्षित किया।
क्योंकि ज़्यदातर समय तक तुर्क साम्राज्य यूरोपियन ताकतों से युद्धों में उलझा रहा, इसलिए वः आर्थिक रूप से कमजोर होता गया।
स्थिरता
यह बात भी सही है कि ओटोमन साम्राज्य में मुग़ल के मुकाबले ज्यादा स्थिरता थी क्योंकि पूरे मिडिल ईस्ट में ओटोमन को चुनौती देने वाली कोई भी ताकत नहीं थी। जबकि मुग़ल साम्राज्य में हर समय सत्ता के लिए संघर्ष रहा। मुग़ल को हर समय बाहरी ताकतों से चुनौती मिलती रही।
पहले अकबर के समय राजपूत राजाओं जैसे मेवाड़ के महाराणा प्रताप और मारवाड़ से मुग़ल को लगातार चुनौतियां मिली। इसके बाद औरंगजेब के समय में उसको दक्षिण से पहले आदिलशाह से फिर उसके बाद साम्राज्य के अंत तक मुग़ल को क्षत्रपति शिवाजी के मराठा साम्राज्य से चुनौती मिली।
धन्यवाद।
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